नेशनल डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बिहार वोटर लिस्ट 2025 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। चुनाव आयोग (Election Commission) के आंकड़ों के अनुसार अब तक 33,000 से अधिक लोगों ने अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है, वहीं 2 लाख से ज्यादा लोगों ने नाम हटाने की मांग की है। दावा–आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि सोमवार तय की गई है।
मसौदा मतदाता सूची जारी
चुनाव आयोग ने जानकारी दी कि मसौदा मतदाता सूची 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित की गई थी। इसके बाद लोगों को 1 सितंबर तक नाम जोड़ने या हटाने के लिए आवेदन करने का मौका दिया गया। आयोग का कहना है कि बिहार में 7.24 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 99.11% ने दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है।
दावा और आपत्ति का अधिकार
चुनाव कानून के अनुसार राजनीतिक दलों और नागरिकों को यह अधिकार है कि वे मतदाता सूची में शामिल गलत नामों पर आपत्ति दर्ज कर सकें। वहीं जिन नागरिकों का नाम सूची में नहीं है लेकिन वे वोट डालने के पात्र हैं, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बूथ-स्तर पर एजेंटों की भी नियुक्ति की गई है। जानकारी के मुताबिक अब तक बूथ-स्तरीय एजेंटों ने 25 आवेदन नाम जोड़ने के लिए और 103 आवेदन नाम हटाने के लिए दर्ज किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
बिहार में मतदाता सूची (Bihar Voter List) संशोधन को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत कई विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दावा–आपत्ति की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है। अदालत ने चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि वह आधार कार्ड समेत 11 अन्य दस्तावेजों को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करे, ताकि पात्र मतदाता आसानी से अपना नाम जुड़वा सकें।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। आयोग ने लोगों से भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
नवंबर में चुनाव की संभावना
राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाया जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025) नवंबर में हो सकते हैं। ऐसे में मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो इसका असर सीधे मतदान प्रतिशत और नतीजों पर पड़ सकता है।
मतदाता सूची पर राजनीति
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि सभी आपत्तियों और दावों की गहन जांच की जा रही है और गलत नाम स्वतः हट जाएंगे। वहीं, जिनका नाम गलती से छूट गया है, उन्हें जोड़ने का पूरा अवसर दिया जा रहा है।
जनता की भागीदारी
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार बिहार में मतदाता सूची (Bihar Voter List 2025) को लेकर असामान्य उत्साह देखने को मिला है। लाखों लोगों ने नाम हटाने और जोड़ने के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से आवेदन किया है। आयोग के मुताबिक इस प्रक्रिया में ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक नागरिकों ने सक्रियता दिखाई है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अगर अदालत समय सीमा बढ़ाती है, तो और भी लोगों को आवेदन का मौका मिलेगा। लेकिन अगर समय सीमा नहीं बढ़ी, तो आयोग तय शेड्यूल के हिसाब से 30 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित करेगा और इसके बाद नवंबर में चुनाव की घोषणा होने की संभावना है।
बिहार चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) से पहले मतदाता सूची पर मचा यह घमासान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। लाखों लोगों का नाम हटाने या जोड़ने की मांग इस बात का संकेत है कि मतदाता इस बार पूरी तरह सजग हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं।






