Vaishno Devi Landslide Updates: वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन से भारी तबाही, 31 की गई जान, रेस्क्यू में जुटी भारतीय सेना

Vaishno Devi Landslide Updates Vaishno Devi Landslide Updates: कटरा मार्ग भूस्खलन से 31 श्रद्धालुओं की जान गई, सेना और NDRF राहत कार्य में जुटी।

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर में मौसम ने एक बार फिर कहर बरपाया है। उत्तराखंड और हिमाचल के बाद अब पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी वर्षा के कारण कटरा से वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले मार्ग पर अर्धकुमारी के पास बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिसमें 30 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया है और फिलहाल यात्रा को स्थगित कर दिया गया है।

24 घंटे में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, जनजीवन ठप

जम्मू शहर में बीते 24 घंटे के भीतर 248-250 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जो साल 1926 के बाद की सबसे अधिक वर्षा है। इसके चलते निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। तवी, ब्यास और झेलम नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे अनंतनाग और कुलगाम समेत दक्षिण कश्मीर के कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

हजारों लोग सुरक्षित निकाले गए, संचार सेवाएं ठप

लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के बाद अब तक 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। NDRF, SDRF, पुलिस और सेना की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गई हैं, जिससे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रशासन ने विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।

ट्रेनें रद्द, यात्री फंसे

मौसम की विकट स्थिति के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने 22 ट्रेनों को रद्द कर दिया है और 27 ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ा। कई तीर्थयात्री कटरा और आसपास के इलाकों में फंसे हुए हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके पास घर लौटने का कोई साधन नहीं बचा है।

भूस्खलन और बादल फटने से बढ़ा खतरा

इससे पहले डोडा और किश्तवाड़ जिलों में बादल फटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही वर्षा से पहाड़ी इलाकों में नए भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे और ढलानों से दूर रहने की सलाह दी है।

जलवायु परिवर्तन का असर, विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आपदाएं जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों का नतीजा हैं। बादल फटना, बाढ़ और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं बढ़ती पर्यावरणीय असंतुलन की ओर इशारा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम न उठाए गए तो भविष्य में इन घटनाओं की तीव्रता और बढ़ सकती है।

प्रशासन की अपील

श्राइन बोर्ड और जिला प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे खराब मौसम में यात्रा न करें और आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और विशेष बचाव दल तैनात किए गए हैं।

प्रकृति का यह रौद्र रूप एक बार फिर चेतावनी दे रहा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता और सतत विकास की नीतियों पर गंभीरता से अमल करने का समय आ गया है। प्रशासन की राहत और बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन आगे मौसम क्या मोड़ लेगा, यह फिलहाल अनिश्चित है।

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