ट्रंप टैरिफ संकट: भारत में पेप्सी, कोका-कोला और मैकडॉनल्ड्स जैसी अमेरिकी कंपनियां बहिष्कार के निशाने पर, स्वदेशी लहर तेज़

ट्रंप टैरिफ संकट भारत में पेप्सी, कोका-कोला और मैकडॉनल्ड्स जैसी अमेरिकी कंपनियां बहिष्कार

नेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने आर्थिक और राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इस फैसले के बाद न सिर्फ भारत में अमेरिका विरोधी स्वर तेज़ हुए हैं, बल्कि पेप्सी, कोका-कोला, मैकडॉनल्ड्स, केएफसी और सबवे जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों को बड़े पैमाने पर बहिष्कार की आशंका झेलनी पड़ रही है।
ट्रंप टैरिफ संकट की वजह से इसका सीधा असर व्यापार और उपभोक्ताओं की मानसिकता पर पड़ रहा है। भारतीय बाजार, जहां इन कंपनियों का अरबों का कारोबार है, अब स्वदेशी आंदोलन और “वोकल फॉर लोकल” अभियान की ओर झुकता दिख रहा है।

ट्रंप की सख्ती और भारत की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने अगस्त में घोषणा की कि रूस से तेल की खरीद जारी रखने की वजह से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनाल्टी लगाई जाएगी। पहले से लागू 25 प्रतिशत टैरिफ को मिलाकर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि भारत रूसी तेल खरीदकर न सिर्फ खुद फायदा उठा रहा है बल्कि उसे मुनाफे के साथ अन्य देशों को भी बेच रहा है।
भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण” बताया। नई दिल्ली ने कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सभी विकल्प खुले रखेगी।

स्वदेशी पर जोर, मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परिस्थिति को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में अवसर के रूप में पेश किया। उन्होंने जनता से अपील की कि खरीदारी का हर निर्णय इस आधार पर होना चाहिए कि वह उत्पाद किसी भारतीय के परिश्रम से बना है। उन्होंने कहा कि हमें “वोकल फॉर लोकल” का मंत्र अपनाना होगा और देश को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी।

ट्रंप टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों पर संकट

भारत का उपभोक्ता बाजार अमेरिकी ब्रांड्स के लिए बेहद अहम है। उदाहरण के तौर पर, पेप्सिको इंडिया ने वित्त वर्ष 2024 में लगभग 8,200 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया। कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में भारतीय बाजार में 3,500–4,000 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है। इसी तरह वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड लिमिटेड, जो पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स संचालित करती है, ने पिछले वित्त वर्ष में 2,390 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
अगर बहिष्कार की लहर तेज होती है तो इन कंपनियों की विकास दर पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े बाजार में कारोबार घटने का मतलब है वैश्विक स्तर पर भी उनकी कमाई में गिरावट।


रामदेव और बहिष्कार का आह्वान

योग गुरु बाबा रामदेव ने ट्रंप की टैरिफ नीति का तीखा विरोध करते हुए भारतीयों से सभी अमेरिकी उत्पादों को नकारने की अपील की। उनका कहना है कि पेप्सी, कोका-कोला, केएफसी और मैकडॉनल्ड्स जैसे ब्रांड्स के काउंटर खाली रहना चाहिए। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय स्वाभिमान” से जोड़ा और कहा कि व्यापक बहिष्कार का असर अमेरिका तक महसूस होगा।


विपक्षी सुर और ऐतिहासिक संदर्भ

आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक कुमार मित्तल ने भी ट्रंप को खुले पत्र के माध्यम से चेतावनी दी। उन्होंने 1905 के स्वदेशी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि यदि आज 146 करोड़ भारतीय वही भावना अपनाते हैं तो अमेरिकी कारोबार पर भारी चोट पड़ेगी। उनका मानना है कि इसका नुकसान अमेरिका को कहीं अधिक होगा जबकि भारत वैकल्पिक व्यापारिक साझेदारियों के माध्यम से स्थिति संभाल सकता है।


वैश्विक स्तर पर अमेरिका विरोध

यह केवल भारत तक सीमित नहीं है। फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में पहले से ही अमेरिकी उत्पादों के बहिष्कार की आवाज़ें उठ रही हैं। ऐसे में भारत का साथ जुड़ना अमेरिकी कंपनियों के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है।


आने वाले दिन कठिन

भारत जैसे विशाल बाजार में अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। यहां उपभोक्ता आधार खोना उनके लिए लंबे समय तक असर डाल सकता है। स्थानीय और स्वदेशी ब्रांड्स पहले से ही मजबूत विकल्प के रूप में मौजूद हैं। बढ़ते राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता के माहौल में भारतीय उपभोक्ता स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने लगे तो विदेशी कंपनियों के लिए अपनी स्थिति बनाए रखना कठिन होगा।

ट्रंप की टैरिफ नीति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वैश्विक व्यापार में आर्थिक दबाव की राजनीति कितनी दूर तक टिक सकती है। भारत में इसका असर सिर्फ राजनयिक स्तर पर नहीं बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी और उपभोक्ता विकल्पों पर भी दिख रहा है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि अमेरिकी कंपनियां भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाए रख पाती हैं या स्वदेशी आंदोलन उन्हें पीछे धकेल देता है।

Spread the news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *