पटना CWC बैठक: कांग्रेस की हुंकार, मोदी सरकार पर वार, BJP का पलटवार, क्या बदलेगी बिहार की सियासत?

Patna CWC Meeting Patna CWC Meeting: कांग्रेस की हुंकार, BJP का पलटवार और बिहार की गरमाती सियासत

नेशनल डेस्क: पटना में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक ने बिहार की सियासत में नई हलचल मचा दी है। आज़ादी के बाद पहली बार बिहार में हुई इस बैठक ने कांग्रेस खेमे में जोश भरने के साथ-साथ राजनीतिक दलों में सरगर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस ने इस मंच से केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला, जबकि भाजपा ने भी तत्काल पलटवार करते हुए कांग्रेस की मंशा और दावों पर सवाल खड़े किए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता और कांग्रेस की सक्रियता का बड़ा संदेश है।

बैठक का आगाज़ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदाकत आश्रम में पार्टी ध्वज फहराकर और राष्ट्रगान गाकर किया। पूरा परिसर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खचाखच भरा नजर आया और माहौल चुनावी नारेबाज़ी से गूंज उठा। राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और सचिन पायलट जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। भले ही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी बैठक में शामिल नहीं हो पाईं, लेकिन भारी भीड़ ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

मोदी सरकार पर खरगे का तीखा प्रहार

अपने संबोधन में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत आज एक गंभीर आर्थिक और कूटनीतिक दौर से गुजर रहा है और इसके लिए मोदी सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। खरगे ने प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय मित्रों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वही लोग भारत को संकट में डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, नोटबंदी और गलत GST नीति का ज़िक्र करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों पर देशभर में जनता की आवाज बनेगी।

खरगे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि संगठित तरीके से वोटर लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं, जिससे गरीबों और वंचितों का वोट छीना जा रहा है। इसे उन्होंने सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं बल्कि गरीबों के राशन, पेंशन और अधिकारों की चोरी करार दिया।

बिहार चुनाव की तैयारियों पर चर्चा

CWC बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा हुई। महागठबंधन में सीट बंटवारे, आरक्षण सीमा बढ़ाने और जमीनी स्तर पर अभियान को मजबूत करने पर मंथन किया गया। खरगे ने NDA में चल रही खींचतान पर तंज कसा और कहा कि भाजपा अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बोझ समझने लगी है और उन्हें मानसिक रूप से रिटायर कर चुकी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बयान महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका को और मजबूत करने का संकेत है।

भाजपा का करारा पलटवार

कांग्रेस के हमलों के बाद भाजपा ने भी तेज़ प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह वही पार्टी है जिसने कभी बिहार के डीएनए पर सवाल उठाए थे और अब अचानक उसे राज्य की चिंता सताने लगी है। प्रसाद ने दावा किया कि बिहार की जनता कांग्रेस को आने वाले 20-25 साल तक भी मौका नहीं देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ आवाज नहीं उठाई और आज जब चुनाव करीब हैं तो वह नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस का संकल्प और आगे की रणनीति

बैठक के अंत में कांग्रेस ने संकल्प लिया कि वह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरेगी और राज्य में सत्ता परिवर्तन का नेतृत्व करेगी। पार्टी ने तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे वहां CWC बैठक के बाद राजनीतिक माहौल बदला और कांग्रेस सत्ता में लौटी, वैसे ही पटना की बैठक भी बिहार में नई राजनीतिक हवा का संकेत है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस अब खुद को सिर्फ विपक्ष की भूमिका तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि खुद को एक मज़बूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर भाजपा भी पूरी तैयारी में है और कांग्रेस के हर हमले का जवाब देने को तैयार दिख रही है। आने वाले हफ्तों में बिहार की सियासत और गरम होगी, और यह देखना दिलचस्प होगा कि पटना से चली कांग्रेस की यह हुंकार चुनावी मैदान में कितनी असरदार साबित होती है।

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