क्या अब राजनीति छोड़ेंगे सिद्धारमैया? बेटे यतींद्र के बयान से कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ी सरगर्मी

सिद्धारमैया के राजनीति से संन्यास की चर्चा पर बेटे यतींद्र का बयान क्या राजनीति से संन्यास लेने वाले हैं Siddaramaiah? बेटे Yatindra के बयान से Karnataka की सियासत में हलचल।

नेशनल डेस्क: कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के हालिया बयान ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। यतींद्र ने कहा कि उनके पिता अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं और अब उन्हें कैबिनेट सहयोगी सतीश जारकीहोली जैसे नेताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं पहले से ही जोरों पर हैं।

सिद्धारमैया पर संन्यास की अटकलें

सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति में तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं और राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। हालांकि उन्होंने कई बार स्पष्ट किया है कि वे पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की कोई योजना नहीं है, लेकिन उनके बेटे के ताजा बयान ने नई अटकलों को हवा दे दी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह बयान संयोग नहीं बल्कि रणनीतिक संकेत है — जिससे पार्टी के अंदर चल रही शक्ति संतुलन की राजनीति पर प्रभाव डाला जा सके।

कांग्रेस में दो खेमों की चर्चा

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से दो धड़े बने हुए हैं — एक सिद्धारमैया समर्थक और दूसरा डी.के. शिवकुमार का। पिछले कुछ महीनों में कई बार ऐसी खबरें आईं कि सिद्धारमैया अपने डिप्टी मुख्यमंत्री शिवकुमार को मौका देने के लिए पद छोड़ सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा था, “मैं पांच साल तक मुख्यमंत्री रहूंगा और जनता की सेवा करूंगा।”
इसके बावजूद कांग्रेस के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर तनाव खत्म नहीं हुआ है।

यतींद्र का बयान और उसका मतलब

बेलगावी में आयोजित एक कार्यक्रम में यतींद्र ने कहा, “मेरे पिता का राजनीतिक करियर अपने अंतिम चरण में है। अब उन्हें ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना चाहिए जिनके पास मजबूत विचार और प्रगतिशील सोच हो। सतीश जारकीहोली में यह गुण हैं।”
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान 2028 के बाद सिद्धारमैया के चुनाव न लड़ने के फैसले से जुड़ा है, लेकिन उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यतींद्र का बयान महज़ भावनात्मक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी रणनीति है। इसके ज़रिए यह संदेश दिया गया है कि सत्ता और नेतृत्व अभी भी सिद्धारमैया खेमे के पास ही रहेगा। साथ ही यह बयान शिवकुमार गुट को यह संकेत देने के लिए भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जल्दबाज़ी न की जाए।

शिवकुमार की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आपको यतींद्र से पूछना चाहिए कि उन्होंने क्या कहा। सिद्धारमैया और मैं पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हम हाईकमान के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है और दोनों नेता राज्य के विकास के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

आगे का रास्ता

हालांकि सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से संन्यास लेने की बात नहीं कही है, लेकिन यह साफ है कि वे उम्र और अनुभव दोनों के लिहाज से अब अपने राजनीतिक सफर के अंतिम मोड़ पर हैं। कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं आने वाले वर्षों में और स्पष्ट हो सकती हैं।
फिलहाल, सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही यह दिखाने की कोशिश में हैं कि पार्टी में एकता कायम है। लेकिन अंदरखाने चल रही रस्साकशी से यह साफ है कि आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।


सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के बयान ने भले ही यह संकेत दिया हो कि मुख्यमंत्री अब धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह मामला अभी खुला हुआ है। कर्नाटक की सियासत में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या 2028 के बाद सिद्धारमैया राजनीति से संन्यास लेंगे या यह सिर्फ सत्ता संतुलन बनाए रखने की एक चाल है?

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