नेशनल डेस्क: चीन की राजधानी बीजिंग बुधवार को इतिहास का गवाह बनी, जब द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भव्य सैन्य परेड आयोजित की गई। तियानआनमेन चौक पर निकली इस परेड ने न केवल चीन की सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का संदेश भी दिया। इस कार्यक्रम में करीब दो दर्जन देशों के नेता शामिल हुए, जिनमें रूस, ईरान, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे चीन के नजदीकी साझेदार भी शामिल रहे।
शी जिनपिंग का निरीक्षण
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रहे, जिन्होंने खुली छत वाली लिमोज़ीन से परेड का निरीक्षण किया। चौक के दोनों ओर सैनिकों की टुकड़ियां सजी थीं और उनके सामने मिसाइल, टैंक, ड्रोन व अन्य अत्याधुनिक हथियार प्रदर्शित किए गए। करीब 70 मिनट तक चली इस परेड में हेलीकॉप्टर आकाश से उड़ान भरते रहे और विशाल बैनरों के जरिए देशभक्ति का माहौल बनाया गया।
परेड का ऐतिहासिक संदर्भ
द्वितीय विश्व युद्ध में चीन को जापानी विस्तारवाद का सीधा सामना करना पड़ा था। 1931 में जापान ने मंचूरिया पर कब्ज़ा किया और 1937 तक चीन के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण जमा लिया। 7 जुलाई 1937 को बीजिंग के पास हुई झड़प ने दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की स्थिति पैदा कर दी। चीन के तत्कालीन नेता च्यांग काई-शेक ने जापानी मांगों को ठुकरा दिया और प्रतिरोध तेज कर दिया। यह संघर्ष 1941 में पर्ल हार्बर पर हमले के बाद द्वितीय विश्व युद्ध का हिस्सा बना और 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ। तभी से चीन इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाता आ रहा है।
पहली बार दिखे कई गुप्त हथियार
इस बार की परेड का मुख्य आकर्षण चीन की मिसाइल प्रणाली रही। JL-1 न्यूक्लियर मिसाइल और DF-5C इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाए गए। DF-5C की रेंज 13,000 किलोमीटर से भी अधिक बताई जाती है और यह एक साथ कई निशानों को भेदने की क्षमता रखती है। इसके अलावा CJ-1000 हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और HQ-29 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल ने भी सबका ध्यान खींचा। HQ-29 को अंतरिक्ष में दुश्मन की मिसाइलों और सैटेलाइट को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।
इसी क्रम में चीन ने अपने नौसेना और वायुसेना के नए हथियार भी दुनिया को दिखाए। J-35 और J-15T जैसे कैरियर-बेस्ड लड़ाकू विमान पहली बार इस परेड में नज़र आए। J-35 को चीन का सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर माना जाता है, जिसे खासतौर पर समुद्री रक्षा के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही YJ सीरीज की हाइपरसोनिक मिसाइलें भी सामने आईं, जो मैक-5 से ज्यादा रफ्तार में उड़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गति वाली मिसाइलों को मौजूदा डिफेंस सिस्टम रोकना बेहद मुश्किल होगा।
चीन के प्रसिद्ध J-20S स्टील्थ जेट और न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता वाले हथियार भी इस प्रदर्शन में शामिल रहे। यह स्पष्ट था कि चीन अपनी रक्षा तकनीक को अमेरिका और रूस के स्तर पर खड़ा करने का दावा कर रहा है।
वैश्विक नेताओं की मौजूदगी
चीन ने इस आयोजन में कई देशों के शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन समेत कई नेता बीजिंग पहुंचे। खास बात यह रही कि किम जोंग उन 2019 के बाद पहली बार चीन आए।
शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने सभी विदेशी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह परेड उस समय आयोजित हुई, जब हाल ही में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक संपन्न हुई थी, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका द्वारा रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर 50% टैरिफ लगाने के निर्णय ने वैश्विक राजनीति को और पेचीदा बना दिया है।
चीन का संदेश
आम तौर पर चीन अपने हथियारों और सैन्य शक्ति के बारे में काफी गोपनीयता बरतता है। लेकिन इस बार उसने खुले तौर पर अपनी ताकत दुनिया के सामने रखी। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का दावा है कि उसके आधुनिक हथियार अब अमेरिकी तकनीक के बराबर खड़े हैं। यह परेड न केवल चीन की तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन था, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी था कि एशिया और दुनिया में उसकी भूमिका अब और मजबूत हो चुकी है।
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