नेशनल डेस्क: देश की न्यायपालिका में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई (CJI B.R. Gavai) का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। इसी क्रम में कानून मंत्रालय ने उनसे उनके उत्तराधिकारी का नाम सुझाने का अनुरोध किया है। परंपरा के अनुसार, यह प्रक्रिया मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने से करीब एक महीने पहले शुरू की जाती है।
CJI गवई 23 नवंबर को होंगे सेवानिवृत्त
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को समाप्त होगा। उनके रिटायरमेंट के साथ ही देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की कमान एक नए हाथों में जाएगी। माना जा रहा है कि गवई अपने उत्तराधिकारी के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का नाम सुझाएंगे। कानून मंत्रालय को नाम भेजने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर जस्टिस सूर्यकांत को औपचारिक रूप से देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
जस्टिस सूर्यकांत का नाम सबसे आगे
वरिष्ठता के आधार पर देखें तो जस्टिस सूर्यकांत अगली पंक्ति में हैं। वे वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल हैं और न्यायिक दृष्टिकोण, संवेदनशील फैसलों और संविधान की गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं। परंपरा के तहत, मौजूदा CJI अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश का नाम आगे बढ़ाते हैं, जिन्हें इस पद के लिए उपयुक्त माना जाता है। गवई की सिफारिश के बाद 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।
हरियाणा के हिसार से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जीवन संघर्ष और समर्पण का उदाहरण है। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज से स्नातक की डिग्री और 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उसी वर्ष उन्होंने हिसार की जिला अदालत में वकालत की शुरुआत की।
कानून के प्रति जुनून और मेहनत ने उन्हें जल्द ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया। वर्ष 1985 में उन्होंने चंडीगढ़ जाकर प्रैक्टिस शुरू की और संवैधानिक, सिविल और सेवा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।
करियर की अहम उपलब्धियां
जस्टिस सूर्यकांत को 2000 में हरियाणा का सबसे युवा एडवोकेट जनरल बनाया गया। यह उनके कानूनी कौशल और नेतृत्व क्षमता की बड़ी पहचान थी। इसके बाद, 9 जनवरी 2004 को वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। वर्ष 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और अगले ही वर्ष, 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
न्यायिक दृष्टिकोण और सोच
जस्टिस सूर्यकांत उन न्यायाधीशों में गिने जाते हैं जो अपने फैसलों में मानवीय दृष्टिकोण को महत्व देते हैं। उन्होंने कई ऐसे मामलों में निर्णय दिए हैं जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों, किसानों और समाज के कमजोर वर्गों से रहा है। उनके फैसलों में न्याय, समानता और संविधान की भावना झलकती है। वे न्यायपालिका में पारदर्शिता और संवेदनशीलता के प्रतीक माने जाते हैं।
न्यायपालिका में नई ऊर्जा की उम्मीद
24 नवंबर को जब वे मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालेंगे, तो न्यायपालिका में एक नई ऊर्जा और दिशा की उम्मीद की जा रही है। जस्टिस सूर्यकांत का सरल स्वभाव, स्पष्ट सोच और न्याय के प्रति निष्ठा उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगन और मेहनत से देश की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचा जा सकता है। हरियाणा के एक छोटे से शहर से निकलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने तक की उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की विदाई के साथ न्यायपालिका के नेतृत्व में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल न केवल न्यायिक परंपराओं को आगे बढ़ाएगा बल्कि नई पीढ़ी के लिए यह संदेश भी देगा कि सच्ची लगन और ईमानदारी से हर मंज़िल हासिल की जा सकती है।






