कम पानी पीना क्यों खतरनाक? डिहाइड्रेशन, स्ट्रेस और हेल्थ रिस्क्स से बचना है, तो जानें रोजाना पानी पीने की सही मात्रा की पूरी जानकारी

Dehydration and Stress Level कम पानी पीने के नुकसान Dehydration and Stress Level: कम पानी पीने के नुकसान और रोजाना पानी पीने की सही मात्रा

नेशनल डेस्क: पानी को अक्सर हम सिर्फ प्यास बुझाने के लिए पीते हैं, लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है। शरीर के सुचारू कामकाज से लेकर मानसिक संतुलन तक, पानी की भूमिका अहम है। हाल ही में जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजियोलॉजी में छपे एक अध्ययन ने यह स्पष्ट किया कि पर्याप्त पानी न पीना तनाव को और बढ़ा सकता है। यानी अगर शरीर डिहाइड्रेटेड है, तो स्ट्रेस रिस्पॉन्स ज्यादा तीव्र हो जाता है, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।

पानी और शरीर का गहरा रिश्ता

मानव शरीर का लगभग 60–70% हिस्सा पानी से बना होता है। यही कारण है कि यह हर छोटे-बड़े शारीरिक फंक्शन के लिए जरूरी है। पाचन, ब्लड सर्कुलेशन, पोषक तत्वों का अवशोषण, शरीर का तापमान बनाए रखना और टॉक्सिन बाहर निकालना – इन सभी के लिए पानी जरूरी है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो थकान, चक्कर, चिड़चिड़ापन और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

डिहाइड्रेशन और स्ट्रेस का संबंध

अध्ययन के मुताबिक, डिहाइड्रेटेड लोगों में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर ज्यादा बढ़ जाता है। कोर्टिसोल सामान्य परिस्थितियों में तनाव से निपटने में मदद करता है, लेकिन इसका लगातार ऊंचा रहना शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकता है। रिसर्च में यह भी पाया गया कि अच्छी तरह हाइड्रेटेड लोग तनाव के दौरान भी अपेक्षाकृत संतुलित रहते हैं।

हार्मोनल बदलाव का असर

जब शरीर में पानी की कमी होती है तो वासोप्रेसिन नामक हार्मोन एक्टिव हो जाता है। यह शरीर में पानी को बनाए रखने का काम करता है, लेकिन इसी के साथ कोर्टिसोल लेवल भी बढ़ा देता है। लंबे समय तक यह असंतुलन हार्ट डिजीज, डायबिटीज और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

प्यास लगना संकेत है कमी का

कई लोग दिनभर में तभी पानी पीते हैं जब उन्हें प्यास लगती है। लेकिन प्यास लगना दरअसल डिहाइड्रेशन का शुरुआती संकेत है। इसका मतलब है कि शरीर को पानी की जरूरत उससे पहले ही थी। इसलिए पानी पीने की आदत प्यास पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

कितनी मात्रा में पानी जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक वयस्क महिला को रोजाना लगभग 2 लीटर (लगभग 8 गिलास) और पुरुष को करीब 2.5 लीटर (लगभग 10 गिलास) पानी पीना चाहिए। यह मात्रा आपकी शारीरिक गतिविधि, उम्र और मौसम के हिसाब से बदल सकती है। अगर आप ज्यादा पसीना बहाते हैं या गर्म इलाकों में रहते हैं तो आपको और अधिक पानी की जरूरत हो सकती है।

हाइड्रेशन चेक करने का आसान तरीका

डिहाइड्रेशन का पता लगाने का सबसे आसान तरीका है पेशाब के रंग को देखना। हल्का पीला रंग दर्शाता है कि शरीर में पानी की मात्रा ठीक है, जबकि गहरा पीला या एम्बर रंग पानी की कमी का संकेत देता है। अगर पेशाब का रंग बहुत गहरा है, तो पानी का सेवन तुरंत बढ़ाना चाहिए।

तनाव भरे दिनों में पानी और जरूरी

इस रिसर्च के सह-लेखक डॉ. डैनियल काशी का कहना है कि स्ट्रेसफुल दिनों में पानी की बोतल अपने पास रखना सबसे आसान और असरदार उपाय है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर तनाव से बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाता है और एनर्जी लेवल भी ठीक रहता है।

पानी के फायदे सिर्फ स्ट्रेस तक सीमित नहीं

पर्याप्त पानी पीने से पाचन बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, नींद की क्वालिटी सुधरती है और त्वचा भी हेल्दी दिखती है। इसके अलावा हाइड्रेटेड रहना इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे कई बीमारियों से बचाव होता है।

रोजमर्रा में पानी पीने की आदत कैसे बनाएं?

सुबह उठते ही खाली पेट एक गिलास पानी पिएं।

हर घंटे कुछ घूंट पानी पीने की आदत डालें।

चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक की जगह सादा पानी को प्राथमिकता दें।

सफर या ऑफिस के दौरान हमेशा बोतल अपने पास रखें।

फोन में पानी पीने का रिमाइंडर सेट कर सकते हैं।

पानी पीना सिर्फ प्यास बुझाने का तरीका नहीं, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा है। इसकी कमी से स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और अपने शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रखें।

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