नेशनल डेस्क: देश की मतदाता सूची को और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। बिहार में इस साल किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नतीजों को देखते हुए अब यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू होगी। इस कवायद का मकसद है कि मतदाता सूची से मृत लोगों, डुप्लीकेट वोटरों और स्थानांतरित हो चुके नागरिकों के नाम हटाकर चुनावी प्रक्रिया को ज्यादा सटीक बनाया जा सके।
बिहार में क्यों सुर्खियों में आया SIR
बिहार में हुई इस प्रक्रिया के पहले चरण में करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए। यह संख्या राज्य के कुल वोटरों का लगभग 10% है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी जो या तो लंबे समय से मृत थे या फिर दो जगहों पर नाम दर्ज कराकर वोटर सूची में बने हुए थे। खास बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के बावजूद इसे लेकर कोई गंभीर कानूनी चुनौती नहीं मिली।
देशभर में 15 करोड़ नाम हटने का अनुमान
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जब यही प्रक्रिया अन्य राज्यों में होगी तो लगभग 15 करोड़ नाम मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। फिलहाल देश में लगभग 100 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। मृत, डुप्लीकेट और फर्जी नाम हटने के बाद यह संख्या करीब 85 करोड़ तक आ सकती है।
बढ़ेगा मतदान प्रतिशत
विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब वोटर लिस्ट से गैर-मौजूद नाम हटा दिए जाएंगे तो मतदान का प्रतिशत अपने आप बढ़ जाएगा। उदाहरण के तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग 66% मतदान हुआ था। यदि कुल मतदाता संख्या घटकर 85 करोड़ हो गई तो यह प्रतिशत 75-77% तक पहुंच सकता है, जिससे चुनाव परिणाम और अधिक वास्तविक और प्रतिनिधिक हो जाएंगे।
दस्तावेज और प्रक्रिया
जिन मतदाताओं के नाम पिछली SIR में मौजूद हैं, उन्हें किसी नए दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। केवल नामांकन प्रपत्र और पुरानी सूची की कॉपी जमा करनी होगी। नए वोटर बनने वालों को डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा जिसमें जन्मतिथि और नागरिकता का विवरण देना होगा।
1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोग केवल अपने जन्म प्रमाण पत्र से नाम जुड़वा सकते हैं। 1987 से 2004 के बीच जन्म लेने वालों को माता-पिता के नागरिकता प्रमाण पत्र दिखाने होंगे। 2004 के बाद जन्मे युवाओं के लिए शर्तें और सख्त होंगी — उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके माता-पिता में कम से कम एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है।
राज्यों में तेजी से तैयारियां
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को इस अभियान के लिए तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की तैनाती हो रही है और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। हर 250 घरों पर एक BLO नियुक्त करने की योजना है ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम छूट न जाए।
2002 की सूची बनेगी आधार
ज्यादातर राज्यों में पिछली बार गहन पुनरीक्षण 2002 से 2004 के बीच हुआ था। इसलिए वही सूची कट-ऑफ मानी जाएगी। दिल्ली, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों में यह सूची वेबसाइट पर पहले ही उपलब्ध करा दी गई है।
विपक्ष का विरोध
बिहार में इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। राजद, कांग्रेस और वामदलों का कहना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाने से गरीब और हाशिए के तबके प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि आयोग का कहना है कि यह केवल मृत, दोहरे और फर्जी नाम हटाने के लिए है ताकि फर्जी वोटिंग पर रोक लगाई जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया पर निगरानी बनाए रखी है और स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता को सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। अदालत का जोर है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
अंतिम सूची जल्द
चुनाव आयोग सितंबर के अंत तक ड्राफ्ट सूची जारी करेगा और दावे-आपत्तियां निपटाने के बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 तक जो भी नागरिक 18 वर्ष के हो जाएंगे, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा।
लोकतंत्र के लिए बड़ा कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करेगी। मतदाता सूची की सफाई से चुनाव अधिक निष्पक्ष होंगे, मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और जनता का भरोसा चुनावी प्रणाली पर और गहरा होगा।
बिहार की तरह देशभर में लागू होगा SIR, चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां, लिस्ट में कौन-कौन हो सकते हैं शामिल?







