नेशनल डेस्क: मानसून की भारी बारिश ने इस बार पूरे देश में ऐसा कहर बरपाया है कि पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बादल फटने, नदियों के उफान और लगातार हो रही वर्षा ने कई राज्यों को आपदा क्षेत्र में बदल दिया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, ओडिशा और राजस्थान समेत 10 से ज्यादा राज्यों में हालात बिगड़े हुए हैं। लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, हजारों गांव पानी से घिरे हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।
जम्मू-कश्मीर: बरसा पानी और टूटा 115 साल का रिकॉर्ड
जम्मू में इस बार बारिश ने बीते 115 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। महज 24 घंटे में 380 मिलीमीटर पानी गिरा, जो आमतौर पर पूरे अगस्त महीने में होता है। डोडा और किश्तवाड़ में नदियां उफान पर हैं, कई पुल बह चुके हैं और बस्तियां पानी में घिर गई हैं। वैष्णो देवी धाम के पास भूस्खलन की चपेट में आकर 30 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई। सेना और NDRF की टीमें लगातार हेलिकॉप्टर और नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रही हैं।
हिमाचल प्रदेश: ब्यास नदी के किनारे उजड़ गईं बस्तियां
हिमाचल का हाल सबसे भयावह है। कुल्लू और मनाली में ब्यास नदी ने किनारे बसे घरों, दुकानों और रेस्टोरेंट को बहा दिया। कुल्लू-मनाली हाईवे के कई हिस्से टूट गए, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया है। चंबा और किन्नौर में भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद आसपास के गांव खाली कराए जा रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है।
पंजाब: 130 से ज्यादा गांव डूबे पानी में
मैदानी इलाकों में भी बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर और होशियारपुर में नदियां उफान पर हैं। रावी, व्यास, सतलुज और झेलम से आया पानी गांवों में घुस गया है। करीब 130 से ज्यादा गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। कई इलाकों में तीन से दस फीट तक पानी भर गया है। हालात इतने खराब हैं कि वायुसेना को हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बीएसएफ की कई चौकियां भी पानी में डूब गई हैं।
उत्तराखंड: भूस्खलन और झीलों से बढ़ा खतरा
उत्तराखंड में भी बारिश का कहर जारी है। चमोली और पिथौरागढ़ में भूस्खलन से सड़कों का संपर्क टूट गया है। उत्तरकाशी में यमुना नदी पर मलबा जमा होने से झील का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। कई गांवों के लोगों को अस्थायी शिविरों में भेजा गया है। देहरादून और नैनीताल में भारी वर्षा को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।
यूपी-बिहार: गंगा-यमुना का उफान
उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रयागराज, हमीरपुर और औरेया में कई बस्तियां पानी में डूब चुकी हैं। बिहार के सीमांचल और उत्तरी जिलों में हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो गए हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
राजस्थान और असम: लगातार संकट
राजस्थान के कोटा, बूंदी और उदयपुर जिलों में नदियां और बरसाती नाले खतरे के निशान पर हैं। कई गांवों का आपसी संपर्क टूट गया है। उदयपुर में तेज बहाव में एक कार बह गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, असम में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां फिर से उफान पर हैं। हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
राहत और बचाव जारी
देशभर में NDRF, SDRF और सेना की टीमें मोर्चा संभाले हुए हैं। हेलिकॉप्टरों से फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। नावों के जरिए गांवों से लोगों को निकाला जा रहा है। प्रभावित इलाकों में खाने-पीने का सामान, दवाइयां और अस्थायी शिविर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों को वित्तीय मदद और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
प्रकृति के आगे इंसान लाचार
हर साल मानसून में ऐसी आपदाएं सामने आती हैं, लेकिन इस बार हालात और भी गंभीर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित निर्माण, नदियों के किनारे अतिक्रमण और बदलती जलवायु स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं। यदि समय रहते ठोस रणनीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में तबाही और बड़ी हो सकती है।
देश इस वक्त एक गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। जरूरत है कि सरकारें न केवल तात्कालिक राहत पर ध्यान दें, बल्कि दीर्घकालिक योजनाओं के जरिए बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की ठोस व्यवस्था करें, ताकि लोगों की जान और संपत्ति दोनों सुरक्षित रह सकें।






