GST Slabs New Changes: मोदी सरकार की बड़ी तैयारी, क्या घटेंगे GST रेट? जानें क्या होगा सस्ता और क्या महंगा

GST Slabs New Changes GST Slabs New Changes: मोदी सरकार की योजना, जीएसटी दरों में कटौती से आम आदमी को राहत।

नेशनल डेस्क: देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू हुए सात साल से अधिक समय हो चुका है। शुरुआत में इसे टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और एक समान दर लागू करने के उद्देश्य से लाया गया था। हालांकि, समय-समय पर दरों में बदलाव, नए स्लैब और छूट के प्रस्ताव आते रहे हैं। अब एक बार फिर से चर्चा तेज है कि आगामी 3 और 4 सितंबर 2025 को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर संकेत दिए थे कि आम जनता को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती संभव है। ऐसे में सबकी नजरें इस बैठक पर टिकी हैं।

खाद्य और वस्त्र उत्पादों पर राहत का संकेत

सूत्रों के अनुसार सरकार की योजना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले खाद्य और वस्त्र उत्पादों पर एक समान 5% दर लागू की जाए। अभी अलग-अलग वस्तुओं पर अलग टैक्स स्लैब है, जिससे भ्रम और वर्गीकरण विवाद पैदा होते हैं। यदि प्रस्ताव पास हो जाता है, तो थाली से लेकर कपड़ों तक की लागत कम हो सकती है।

जीएसटी 2.0 – टैक्स ढांचे में बड़ा सुधार

सरकार इस पहल को ‘GST 2.0’ नाम दे रही है। इसका लक्ष्य है टैक्स प्रणाली को इतना आसान बनाना कि उपभोक्ताओं और कारोबारियों को नियमों की जटिलताओं से न गुजरना पड़े। एक समान दर लागू होने से विवाद कम होंगे और टैक्स चोरी की गुंजाइश भी घटेगी।

सीमेंट पर कर में कटौती की तैयारी

निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा बोझ सीमेंट पर 28% टैक्स का है। खबर है कि काउंसिल बैठक में इसे घटाकर 18% करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। ऐसा होने पर घर बनाने वालों के लिए लागत काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि यह भी चुनौती होगी कि निर्माण कंपनियां इस लाभ को उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।

सैलून सेवाओं में भी राहत संभव

ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर के लिए भी खुशखबरी आ सकती है। प्रस्ताव है कि छोटे सैलून पर टैक्स पूरी तरह हटा दिया जाए और मिड तथा बड़े सैलून के लिए इसे 18% से घटाकर 5% किया जाए। इससे आम लोगों के लिए हेयरकट जैसी बेसिक सेवाओं की कीमत घट सकती है।

बीमा पॉलिसियों पर टैक्स खत्म करने की योजना

स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार इन पर जीएसटी को शून्य करने पर विचार कर रही है। ऐसा होने पर बीमा प्रीमियम सस्ता होगा और मध्यम वर्ग भी आसानी से हेल्थ कवर ले पाएगा।

छोटी कारों के दाम में कमी की संभावना

ऑटो सेक्टर में भी राहत देने की योजना बन रही है। फिलहाल 4 मीटर तक की कारों पर 28% जीएसटी के अलावा 22% सेस लगता है, जिससे कुल टैक्स लगभग 50% हो जाता है। प्रस्ताव के अनुसार इसे घटाकर 18% करने की बात है, जिससे कीमतों में कमी आएगी और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।

वर्गीकरण विवाद खत्म करने का प्रयास

जीएसटी ढांचे में अक्सर यह समस्या सामने आती रही है कि कुछ विशेष श्रेणियों को ही दरों में छूट मिलती है। सरकार चाहती है कि ये थ्रेशोल्ड हटाकर सभी को समान लाभ मिले। इससे व्यापार करना आसान होगा और विवादों की गुंजाइश घटेगी।

क्या राज्यों की सहमति मिलेगी?

इन प्रस्तावों के साथ सबसे बड़ी चुनौती राज्यों की सहमति है। जीएसटी काउंसिल में केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर राजस्व को लेकर मतभेद होते हैं। राज्यों को आशंका रहती है कि दरों में कमी से उनका टैक्स संग्रह घट सकता है। ऐसे में केंद्र को मुआवजा व्यवस्था या वैकल्पिक राजस्व स्रोत तलाशने होंगे।

आम आदमी के लिए राहत या सिर्फ उम्मीद?

अगर सारे प्रस्ताव पास हो जाते हैं तो किचन के सामान से लेकर कपड़ों, कारों, बीमा और सैलून सेवाओं तक कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। महंगाई का बोझ घटेगा और उपभोक्ताओं के पास ज्यादा पैसा बचेगा।

फैसला सितंबर की बैठक पर निर्भर

जीएसटी दरों में कटौती का प्रस्ताव निश्चित रूप से राहत भरा हो सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इसे लागू करें और लाभ वास्तव में जनता तक पहुंचे। 3-4 सितंबर की बैठक के बाद ही साफ होगा कि आम जनता को सस्ती सेवाएं और उत्पाद मिलेंगे या फिर मामला सहमति के अभाव में अटक जाएगा।

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