नेशनल डेस्क: पंजाब इस समय विनाशकारी बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हुई भारी बारिश और हिमाचल प्रदेश के बांधों से छोड़े गए पानी ने राज्य के कई जिलों में तबाही मचा दी है। हजारों घर जलमग्न हो चुके हैं, सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें बर्बाद हो गई हैं और लाखों लोग रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस विकट स्थिति के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान खुद प्रभावित इलाकों में पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
गांवों तक नाव से पहुंचे सीएम मान
मंगलवार को मुख्यमंत्री फिरोजपुर जिले के गांव गट्टी राजोके पहुंचे। नाव के जरिए जब वे बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे थे, तो ग्रामीणों से उनकी सीधी बातचीत हुई। एक बुज़ुर्ग महिला ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए सिर पर हाथ रखा तो मान की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य वहां मौजूद हर किसी के दिल को छू गया और इसने साफ कर दिया कि आपदा की घड़ी में नेता और जनता का रिश्ता राजनीति से कहीं बड़ा होता है।
ज़मीन पर बैठकर सुनी समस्याएं
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों के घरों में जाकर हालात समझे। वे ग्रामीणों के साथ ज़मीन पर बैठकर उनकी तकलीफ़ें सुनते रहे। एक शिकायत, जो पंजाबी में लिखी गई थी, उन्होंने खुद पढ़ी और तुरंत अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इससे लोगों के भीतर यह भरोसा पैदा हुआ कि उनकी बात सीधे सरकार तक पहुंच रही है और कोई भी मुद्दा फाइलों में दबा नहीं रह जाएगा।
सुरक्षा के बीच संवेदनशीलता
हालांकि पूरा दौरा कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच हुआ और मान ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन ग्रामीणों से उनका जुड़ाव बेहद आत्मीय था। बच्चों के साथ उन्होंने सहज अंदाज़ में बातें कीं, युवाओं को हिम्मत बनाए रखने की सलाह दी और बुज़ुर्गों की पीड़ा को गंभीरता से सुना। उनका यह व्यवहार दर्शाता है कि संकट में संवेदनशील नेतृत्व ही लोगों को उम्मीद दे सकता है।
मुआवज़े और राहत का वादा
मान ने घोषणा की कि सरकार हर प्रभावित व्यक्ति तक मुआवज़ा पहुंचाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि आपदा राहत फंड के नियम बदले जाएं और रोके गए 60,000 करोड़ रुपये तुरंत जारी किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों को फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये मिलने चाहिए। इसके साथ ही, जिन परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं, उन्हें 8 लाख रुपये और अपंग हुए लोगों को 5 लाख रुपये तक मुआवज़ा देने की सिफारिश उन्होंने की। मान ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा मुआवज़े की शर्तें किसानों और पशुपालकों के असली नुकसान की तुलना में बेहद अपर्याप्त हैं।
पंजाब में तबाही के आंकड़े
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब के 12 जिलों में 1,300 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं। करीब ढाई लाख लोग प्रभावित हुए हैं और लगभग 3 लाख एकड़ धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इसके अलावा पशुधन की मौत ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरी चोट दी है। किसानों और खेत मज़दूरों के सामने आजीविका की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
राहत और बचाव अभियान
सरकारी मशीनरी के साथ-साथ सेना, एनडीआरएफ, बीएसएफ और पंजाब पुलिस लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी है। अब तक 11,300 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। करीब 4,700 लोगों को सुरक्षित शिविरों में शिफ्ट किया गया है। अमृतसर में ड्रोन की मदद से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, वहीं फिरोजपुर में बीएसएफ की नावें लगातार लोगों को निकालने का काम कर रही हैं।
समाज भी आगे आया
इस संकट की घड़ी में पंजाब के कलाकार, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग भी पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं। कहीं सामूहिक लंगर लगाए जा रहे हैं, तो कहीं राहत सामग्री एकत्र कर प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई जा रही है। यह सामूहिक प्रयास पंजाब की परंपरा और भाईचारे की ताकत को दर्शाता है।
भावनाओं से जुड़ा नेतृत्व
सीएम मान का यह दौरा केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं रहा। जब वे ग्रामीणों के बीच बैठे, उनके दुख बांटे और एक बुज़ुर्ग महिला के आशीर्वाद से भावुक हो उठे, तो यह तस्वीर पंजाब के लिए उम्मीद की निशानी बन गई। यह दिखाता है कि जनता के भरोसे को मजबूत करने के लिए संवेदनशीलता और सक्रियता दोनों जरूरी हैं।
आगे की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में राज्य सरकार आपदा प्रबंधन की मजबूत रणनीति तैयार करेगी, ताकि ऐसी तबाही की स्थिति में लोगों को कम से कम नुकसान उठाना पड़े। उन्होंने भरोसा जताया कि पंजाब की जनता कठिन परिस्थितियों से निकलने की क्षमता रखती है और यह संकट भी सामूहिक एकजुटता से पार किया जाएगा।
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