नेशनल डेस्क: नेपाल में हाल ही में जो कुछ हुआ, उसने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी। वहाँ की नई पीढ़ी यानी Gen-Z ने सोशल मीडिया के जरिए बड़ा आंदोलन खड़ा किया, सड़कों पर आगजनी हुई, सरकारी इमारतें जला दी गईं और आखिरकार सरकार को गिरना पड़ा। यह घटना सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही, इसकी गूंज अब भारत की सियासत में भी सुनाई दे रही है। वजह है कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक ट्वीट, जिसमें उन्होंने सीधे Gen-Z को संबोधित किया।
राहुल गांधी का ट्वीट और शुरू हुआ विवाद
18 सितंबर को राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
“देश के युवा, देश के छात्र, देश के Gen-Z संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे। मैं उनके साथ हमेशा खड़ा हूं। जय हिंद।”
यह पोस्ट आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और भाजपा ने इसे राहुल गांधी का ‘नेपाल प्लान’ करार दिया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Gen-Z परिवारवाद के खिलाफ है, तो नेहरू-गांधी परिवार को क्यों बर्दाश्त करेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते हैं लेकिन खुद भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हुए हैं। निशिकांत दुबे ने सवाल उठाया कि अगर नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग उठ सकती है तो भारत में क्यों नहीं?
वोट चोरी पर राहुल का आरोप
राहुल गांधी का ट्वीट दरअसल उनकी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से हजारों नाम काटे जाने का आरोप लगाया था। राहुल गांधी का दावा है कि यह जानकारी उन्हें खुद चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिली है।
सियासत में नेपाल की गूंज
राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि राहुल गांधी युवाओं को लोकतंत्र में भागीदारी सिखाने की बजाय उन्हें भड़का रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी भारत में भी नेपाल जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं, जहाँ आंदोलन हिंसक हो गया था और सरकार को जाना पड़ा।
क्या भारत को चाहिए नेपाल जैसा आंदोलन?
सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या भारत को भी ऐसे आंदोलन की जरूरत है? भारत को ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ कहा जाता है। यहाँ की चुनावी प्रक्रिया को पूरी दुनिया आदर्श मानती है। यही व्यवस्था है जिसने नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी को सत्ता तक पहुँचाया। अगर यह व्यवस्था गलत है, तो कांग्रेस दशकों तक सत्ता में कैसे बनी रही?
युवाओं का आक्रोश और सही दिशा
Gen-Z पीढ़ी निश्चित रूप से जागरूक और बेबाक है। वह भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। लेकिन इस गुस्से को सही दिशा देना नेताओं की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में असली ताकत सड़क पर आग लगाने में नहीं, बल्कि बैलेट बॉक्स में होती है। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के उदाहरण बताते हैं कि ऐसे आंदोलनों से कभी-कभी बदलाव तो आता है लेकिन उसके बाद अराजकता बढ़ जाती है।
विपक्ष की भूमिका अहम
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सिर्फ सवाल उठाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे समाधान भी देना चाहिए। राहुल गांधी का वोट चोरी के खिलाफ अभियान सही हो सकता है, लेकिन इसे हिंसा या विद्रोह का रूप देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
भारत में सुधार की जरूरत है, लेकिन रास्ता लोकतांत्रिक होना चाहिए। युवाओं को जागरूक करना जरूरी है, लेकिन उन्हें हिंसा की ओर धकेलना नहीं। राहुल गांधी का अभियान तब सार्थक होगा, जब वह युवाओं को सिस्टम के भीतर रहकर बदलाव लाने के लिए प्रेरित करें। भारत को आग नहीं, सकारात्मक ऊर्जा की जरूरत है। वही ऊर्जा जो संविधान की रक्षा करे और लोकतंत्र को मजबूत बनाए।
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