नेशनल डेस्क: उत्तराखंड एक बार फिर बादल फटने की विभीषिका से जूझ रहा है। राज्य के चमोली जिले की तहसील देवाल और रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार क्षेत्र में देर रात बादल फटने की घटनाओं ने तबाही मचा दी। पहाड़ों से अचानक आया मलबा घरों, गोशालाओं और सड़कों में भर गया, जिसके चलते कई परिवार मुश्किल में फंस गए। चमोली से दो लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है, जबकि कई ग्रामीण घायल हुए हैं।
देवाल में तबाही का मंजर
चमोली जिले के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में बादल फटने के बाद भारी मात्रा में मलबा आया। इस मलबे ने कई मकानों और गोशालाओं को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में तारा सिंह नामक ग्रामीण और उनकी पत्नी लापता हो गए हैं। वहीं, विक्रम सिंह और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, बादल फटने के बाद इतनी तेजी से पानी और मलबा बहकर आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका मलबे और पत्थरों से भर गया। कई घरों में घुटनों तक मिट्टी और गाद जमा हो गई, जिससे ग्रामीणों के लिए घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया।
मवेशियों की मौत की आशंका
इस आपदा की चपेट में सिर्फ इंसानी जानें ही नहीं बल्कि मवेशी भी आए हैं। एक गोशाला पर मलबा गिरने की खबर है, जिसमें 15 से 20 पशुओं के दबने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन भारी मलबा और लगातार बारिश राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही है।
रुद्रप्रयाग में भी बिगड़े हालात
देवाल के साथ-साथ रुद्रप्रयाग जिले में भी भारी तबाही की खबर है। बसुकेदार क्षेत्र के बड़ेथ डुंगर तोक में बादल फटने से कई घरों और खेतों को नुकसान हुआ है। गौरीकुंड-रुद्रप्रयाग-ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन हुआ है, जिसके चलते हाईवे कई घंटों तक बंद रहा। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है और लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
उत्तरकाशी में भी भारी बारिश
उधर, उत्तरकाशी जिले में भी देर रात से लगातार बारिश ने तबाही मचाई है। गंगोत्री नेशनल हाईवे पर आधा दर्जन से ज्यादा स्थानों पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। नेताला, पापड़ गाड और नालू पानी जैसे क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह बंद हैं। ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले कई छोटे मार्ग भी बाधित हुए हैं, जिससे सैकड़ों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
सीएम धामी ने दिए राहत कार्य के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर दुख जताया और प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चमोली और रुद्रप्रयाग में बादल फटने से हुए हादसों में कई परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम ने यह भी कहा कि वे लगातार अधिकारियों से संपर्क में हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बाबा केदार से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना की।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि बादल फटने की घटना में दो लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। कई पशुओं की मौत की भी आशंका है। उन्होंने कहा कि पूरे जिले में भारी बारिश से सड़कों का नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई मार्ग बंद पड़े हैं। राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं।
लगातार बारिश बनी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से जमीन की पकड़ कमजोर हो गई है। इसके कारण भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। इस वक्त ज्योर्तिमठ, थराली, नारायणबगड़ और कर्णप्रयाग जैसे क्षेत्रों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और नालों के पास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
जनजीवन अस्त-व्यस्त
लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। कई गांवों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो चुकी है। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीणों को खाने-पीने की वस्तुओं की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है।
चमोली और रुद्रप्रयाग में हुई यह घटना उत्तराखंड की नाजुक भौगोलिक स्थिति को एक बार फिर सामने लाती है। पहाड़ों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हर साल तबाही मचाती हैं, लेकिन इस बार भी राज्य को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।






